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Category: हिंदी कविता

बिटिया 👧 अनमोल हीरा

मेहंदी रोली कंगन का सिँगार नही होता”’ रक्षा बँधन भईया दूज का त्योहार नहीं होता”” रह जाते है वो घर

पराई होती है बेटियाँ !!!!

  चिड़ियाँ होती है  लाड़कियाँ ,  ………. मगर पंख नहीं होते लाड़कियों के …..! मायके भी होते हैं , ससुराल

बसंती हवा

  हवा हूँ , हवा मैं बसंती हवा हूँ | सुनो बात मेरी – अनोखी हवा हूँ|  बड़ी बावली हूँ

हिमालय का संदेश

  खड़ा हिमालय बता रहा है | डरो ना आंधी पानी से || खड़े रहो तुम अविचल होकर | सब

बीज

  किसी नदी के किनारे एक बीज पड़ा था | वह बहुत छोटा था , वहाँ एक चिड़ीया आई |

लालच से कभी सुख नहीं मिलता।

रामदास एक ग्वाले का बेटा था। रोज सुबह वह अपनी गायों को चराने जंगल में ले जाता। हर गाय के

हरिवंशराय बच्चन की एक सुंदर कविता …

हरिवंशराय बच्चन की एक सुंदर कविता … खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही

रक्षा बंधन

🌸चंदन कि लकड़ी🌸 🌸फूलोंका  हार🌸 🌸आगस्त का महीना🌸 🌸सावन कि फूहार🌸 🌸भैया कि कलाई🌸 🌸बहन का प्यार🌸 🌸मुबारक हो🌸 🌸आपको

दिल मे रहना आना चाहिए…

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए  फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी  फिर भरेगा कौन ?

प्रार्थना में बड़ी शक्ति होती है

डॉ. मार्क जो की एक बहुत ही प्रसिद्ध कैंसर स्पेशलिस्ट थे , उन्हें एक बार किसी समारोह में भाग लेने