स्मार्टेस्ट सीईओ का स्मार्ट मंत्र- भूखे रहो, मूर्ख रहो)

स्मार्टेस्ट सीईओ का स्मार्ट मंत्र- भूखे रहो, मूर्ख रहो

जानी मानी बिजनेस मैगजीन फॉरच्यून ने हाल में आईटी कंपनी ऐपल के सीईओ स्टीव जॉब्स को टेक्नॉलजी फील्ड के 50 स्मार्ट पीपुल में नंबर एक खिताब से नवाजा है। जॉब्स की इस उपलब्धि के पीछे एक लंबी दास्तां है। आइए जानते हैं स्टीव जॉब्स के जीवन के कुछ ऐसे अनछुए पहलुओं के बारे में, जो आपको न सिर्फ चौंकाएंगे बल्कि प्रेरणा भी देंगे।

स्टीव जॉब्स के जन्म के वक्त उनकी मां कुंवारी थीं। इसलिए उन्होंने तय किया था कि वह उन्हें ऐसे कपल को गोद देंगी, जो ग्रैजुएट हो। उनकी मां ने ऐसा कपल ढूंढ भी लिया, पर जब स्टीव का जन्म हुआ, तो उस कपल ने उसे गोद लेने से मना कर दिया, क्योंकि वह लड़की अडॉप्ट करना चाहते थे। फिर एक दूसरा कपल ढूंढा गया, उसे गोद देने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन इस दौरान स्टीव की मां को पता चला कि वह कपल ग्रैजुएट नहीं है तो उन्होंने गोद देने से मना कर दिया। अंत में स्टीव को इस शर्त पर गोद दिया गया कि उन्हें कॉलेज जरूर भेजा जाएगा।

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17 साल की उम्र में स्टीव कॉलेज गए, लेकिन 6 महीने बाद ही उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया। एक तो कॉलेज की फीस में उनके पैरंट्स का बहुत पैसा लग रहा था, दूसरे स्टीव को लग रहा था कि कॉलेज की पढ़ाई से उन्हें क्या फायदा होगा। इन मुश्किल भरे दिनों में स्टीव के पास सोने के लिये कमरा भी नहीं था, वह दोस्तों के कमरे में जमीन पर सोते थे। वह कोक की बोतलों को जमा कर बेचते थे, ताकि उनके खाने का इंतजाम हो सके। वह संडे को सात मील चलकर हरे कृष्णा मन्दिर जाते थे, क्योंकि वहां अच्छा खाना मिल जाता था। इस दौरान जॉब्स ने रीड कालेज से कैलीग्राफी (लिपि/अक्षर बनाने की कला) सीखी। लेकिन उस वक्त उस आर्ट का वह कोई खास प्रयोग नहीं कर पाए। 10 साल बाद जब उन्होंने पहला कंप्यूटर मैकिंतोश बनाया, तो यह आर्ट बहुत काम आई। स्टीव कहते हैं कि यदि कॉलेज नहीं छोड़ता, तो यह अद्भुत आर्ट कभी नहीं सीख पाता।

स्टीव ने अपने पैरंट्स के गैरेज में ‘ऐपल’ की शुरूआत की। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। 10 साल में ऐपल, गैरेज में काम करने वाले दो लोगों से बढकर दो बिलियन डॉलर और 4000 कर्मचारियों वाली कंपनी बन गई। लेकिन फिर स्टीव को उन्हीं की कंपनी से बाहर कर दिया गया। लेकिन धुन के पक्के स्टीव ने अगले पांच सालों में एक कंपनी नेक्स्ट शुरू की और कुछ समय बाद नेक्स्ट को भी एक मुकाम तक पहुंचा दिया। उन्होंने एक और कम्पनी पिक्सार भी शुरू की। पिक्सार ने विश्व की सबसे पहली कंप्यूटर द्वारा बनी एनीमेशन फीचर फिल्म टॉय स्टोरीज् बनाई। आज पिक्सार विश्व का सबसे सफल एनीमेशन स्टूडियो है। हर बात में पॉजिटिविटी ढूंढ लेने वाले स्टीव कहते है, मुझे पूरा विश्वास है कि यदि मुझे ऐपल से निकाला नहीं गया होता तो ये सब कुछ नहीं होता। स्टीव के संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अचानक एक दिन उन्हें पता चला कि उन्हें पित्ताशय का कैंसर है, डॉक्टरों ने उन्हें जवाब दे दिया, लेकिन बाद में एक टेस्टिंग के दौरान डॉक्टर्स ने पाया कि उनका इलाज हो सकता है।

अपनी कामयाबी का राज बताते हुए स्टीव कहते हैं कि जब वह जवान थे, उस वक्त होल अर्थ कैटेलॉग प्रकाशित होता था, जो उस पीढ़ी के लिए बाइबिल था। उसे गूगल का पेपरबैक अंक कहा जा सकता है। उसके अंतिम प्रकाशन में अंत में ‘भूखे रहो, मूर्ख रहो’ लिखा हुआ था, जिसका मतलब था कि ज्ञान के लिए हमेशा लालायित रहो। बस यही वाक्य स्टीव के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण बन गया। बौद्ध धर्म के अनुयायी स्टीव बेहतर प्रेजेंटर भी हैं। उनकी प्रेजेंटेशन में लोगों को प्रभावित करने की अद्भुत क्षमता है।

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