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सिंहासन बत्तीसी की पहली पुतली

एक  समय की बात है|  राजा भोज को बहुत बड़ा सिंघासन मिला जिसमे बत्तीस पुतलिया लगी थी | जब राजा भोज उस सिंहासन पर बैठने गए तो उस सिंहासन की पहली पुतली सिंहासन से बाहर निकल कर के अप्सरा का रूप ले की और कहने लगी अरे – अरे राजा भोज कहा चले सिंहासन पर बैठने हाहाहाहाहा | आप जानते है की ये सिंघासन  किसका है ? ये सिंहासन है महा पराकर्मी राजा बिक्रमादित्य का | आप जानते है वे कौन थे ? नही न तो सुनिए | और पुतली ने राजा भोज को एक कहानी सुनाई  सुनो राजा भोज | इंद्रलोक में  एक अप्सरा है मोहिनी | नृत्य  में बरी कुशल  | जब वो देवराज इंद्र के सामने अपना नृत्य का प्रदर्सन करती तो इंद्र केवल उसकी प्रसंसा ही करते | एक दिन मोहिनी ने कहा देव आप हमारी गलतियों को भी बताएये | देवराज इंद्र ने कहा की मुझे तो कोई गलतिया नही दिखती हा नृत्य में सब देवो में भगवन शिवसंकर सबसे जायदा जानते है | इसलिए तुम जाओ उनके पास अगर वो तुम्हारी नृत्य से प्रसन्न हो गये तो समझना की कोई कमी नही है तुम्हारे नृत्य में | फिर मोहिनी ने इंद्र को प्रणाम किया और कैलाश की और बड़ी | इतने में इंद्र का पुत्र ने मोहिनी को रोका जब मोहिनी नही रुकी तो इंद्रपुत्र ने मोहिनी को बंदी बना लिया | और एक गुप्त गुफा में ले गया और मोहिनी को वही बंदी बना के रख लिया | इसी तरह कुछ दिन बीत गये | जब देवराज इंद्र ने अपने दूत को कैलास भेजा तो दूत ने ये समाचार दिया की मोहिनी तो कैलाश पहुची ही नही तब इंद्र ने अपनी माया से देख लिया की मोहिनी तो उनके पुत्र के चंगुल में  है तब इंद्र ने उसे वह से छुरा लिया और अपने पुत्र को शाप दिया की रे मुर्ख तू ने मेरा ही नही बल्कि शिवसंकर का भी अपमान किया है | इसलिए में तुझे शाप देता हुँ की तू पृथ्वी लोक में जाकर गधे का जीवन व्यतीत करेगा | और इंद्रपुत्र उसी छन गधा बन गया | और पृथ्वी पर आ गया | जब वह गधा बन कर घास खा रहा था उसी समय एक धोबी का गधा कही भटक गया था और उस धोबी ने इंद्रपुत्र को अपना गधा समझ कर अपने घर ले गया |  और इंद्रपुत्र से सब काम करवाने लगा एक दिन की बात है जब धोबी गधा की पीठ पर कपड़ा लाद कर घाट पर गया तो संयोग से उसी घाट पर उस नगर के राजा की बेटी स्नान कर रही थी | इंद्रपुत्र ने जब उस राजकुमारी को देखा को उस पर मोहित हो गया और घर आने के बाद रात में धोबी से कहने लगा अरे ऐ धोबी सुनते हो में गधा हु गधा | धोबी डर गया कौन गधा ??? तुम कोई भुत हो सामने आओ | गधा बोला अरे ओ मुर्ख में तेरा गधा बोल रहा हुँ | इधर देख जब धोबी ने गधे को देखा तो सच में उसका गधा ही  बोल रहा था | गधा बोला देखो धोबी मुझे इस नगर के राजा की बेटी पसंद आ गयी है | इसलिए तुम जाओ और राजा से मेरे बिबाह की बात करो | धोबी बोला तू गधा है और में तेरे बिबाह की आत राजा से करू पागल समझता है मुझे क्या | इसपर गधा बोला अगर तुने मेरे कहने पर राजा से बात नही की तो में तेरा घर तोर दूंगा | इसपर धोबी बोला की ठीक है लेकिन में नही जाऊंगा राजा से बात करने

| अब गधा एक की लात से उस धोबी के घर का एक भाग तोर दिया इसपर धोबी डर गया और तुरंत राजा के पास जा कर सारा हाल सुनाया | इतना सुन कर राजा के सभी सिपाही उस धोबी की ओर उसे मारने के लिए दौरे | लेकिन राजा बहुत समझदार थे | उन्होने उसे छोड़ दिया | और जब रात हुई तो राजा उस धोबी के घर जा कर छुप कर देखने लगे | और देख कर चकित हो गए गधा बोल रहा था | में इंद्रपुत्र हु मुर्ख | अगर राजा ने मेरे बात नही मानी तो में उसके राज्य को समाप्त कर दूंगा | ये सुनकर राजा बहुत डर गए वे सोंच रहे थे की ये गधा आसुरीशक्ति है या इंद्रपुत्र पर  राजा ने इस बात का फैसला राजकुमारी पर छोड़ दिया | और राजकुमारी ने उस गधा से एकांत में बात करने की मांग की | और गधा ने सब कहानी उस राजकुमारी को कह सुनाया | और बोला की अगर पृथ्वी पे में किसी युवती से विवाह कर लूँगा तो मई शाप मुक्त हो जाऊंगा | फिर राजकुमारी ने उस गधे से एक वचन माँगा की आप शाप मुक्त होने के बाद मुझे छोड़ कर इंदलोक नही जाएंगे | और राजकुमारी और गधा का विवाह हो गया | उसी छन गधा शाप मुक्त हो गया और एक सुंदर पुरुष बन गया | उन्हे बाद में तीन संतान हुई जिसमे विक्रमादित्य सबसे छोटे थे | ये कहानी सुनने के बाद उस अप्सरा ने राजा भोज से कहा | राजा भोज ये तो बिक्रमादित्य की जन्म की कहानी थी | आज जाइये और कल फिर आना इस बत्तीस पुतली वाले सिंघासन पर बैठने | और वो पुतली गायब हो गई | जब राजा भोज दुसरे दिन गये तो उस सिंघासन की दूसरी पुतली निकल कर अप्सरा का रूप धारण कर के सिंघासनबत्तिशी की दूसरी कहानी सुनाई |

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