विधार्थियों , इन्हें अपनाओ और सदा सुख पाओ ((भाग -4 ))

विधार्थियों ! जैसे रसायन विज्ञान भौतिकी अथवा में हर क्रिया के परिणाम का विज्ञान कराया जाता है , वैसे ही मानवीय कर्मों का भी तो कोई विज्ञान अथवा दर्शन होगा ? जैसे अर्थशास्त्र में या रसायन विज्ञान,  हम यह अध्ययन करते हैं कि अमुक वृतांत अथवा पुरुषार्थ से अमुक परिणाम हमारे समाने आते हैं | वैसे ही मनुष्य के कर्म भी तो कोई फल सामने लाते होंगे , चाहे वे सुख के रूप में हो या दुःख के रूप में |

 

अन्तर केवल इतना है भौतिक पदार्थ , रसायनिक पदार्थ अथवा तत्व चेतन न होने के कारण विचार नहीं कर सकते , निर्णय भी नहीं ले सकते और सुख दुःख की अनुभूति भी नहीं कर सकते और न ही वे किसी उद्देश्य को लेकर क्रिया – प्रतिक्रिया में भाग ले सकते हैं |Related image

 

 

जबकि मनुष्य चेतन है , विचार शील है , उद्देश्य या प्रयोजन को सामने रख कर कर्म करता है | वह किसी इच्छा और प्रयोजन को समाने रख कर कर्म करता है और समाज पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को , पहले से जान भी सकता है |

 

अतः मनुष्य के कर्मों के साथ अच्छाई या बुराई का पहलु भी जुटा होता है जब की तत्वों पदर्थों या प्रकृतिक शक्तियों की क्रिया , प्रतिक्रिया में निर्णय शक्ति नहीं होने के कारण वे नैतिक पक्ष को साथ नहीं रखते हैं |

अतः विधार्थियों ! आप प्राकृतिक नियमों का भी ज्ञान प्राप्त करो और उनका जीवन में प्रयोग करके, अच्छे से अच्छे तथा पूर्णत अच्छे बनने का यत्न करो | आप अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाओ और सदा सुख पाओ |

 

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