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विधार्थियों , इन्हें अपनाओ और सदा सुख पाओ (( भाग -3 ))

जीवन को सुख पूर्वक जीने की भी एक कला है | जीवन में शांति को बनाये रखना भी एक विद्या है | यह जीवन क्या है , इसका अध्ययन भी एक विज्ञान है | अतः विधार्थियों जहाँ अन्य कला सीखते , अन्य विद्या का अध्ययन करते तथा विज्ञान पढ़ते हो वहाँ यदि इस कला में कुशलता प्राप्त नहीं की , यदि मन में शांति बनाये रखने की विधा नहीं पढ़ी और यदि जीवन को सुखमय बनाने का विज्ञान नहीं सीखा तब अन्य विधाओं के द्वारा धन तो कमा सकोगे , पदार्थों का संग्रह तो कर सकोगे , साधन तो जुटा सकोगे परन्तु मन में शांति के बिना वे सभी फीके लगेगे , वे सुहायेंगे ही नहीं जैसे की मन में चिन्ता होने पर डलपन के तकिये और फोम के गदेले का प्रयोग करने पर भी मनुष्य को सुख चैन की नींद नहीं आती है |

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अतः आवश्यक बात यह है कि जैसे आग को बुझाने के लिए जल भण्डार तथा अग्नि शामक यंत्र की पहले से व्यवस्था बनी होती है , वैसे ही अशांति और दुखकर परिस्थितियों के उपस्थित होने से पहले ही इस कला और विज्ञान का अध्ययन कर लेना चाहिये ताकि आगे के लिए तैयारी हुई रहे |

अतः विधार्थियों ! इसका अध्ययन करो और सदा सुख पाओ |

 

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