लक्ष्य के प्रमुख पड़ाव

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लक्ष्य का निर्धारण

बिना लक्ष्य निर्धारण के व्यक्ति इधर- उधर भागता रहता है | अगर आप  को यह पता नही है कि आप की मंजील क्या है? आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं? आप की आकांक्षा क्या है तो आप के द्वरा की गई प्रत्येक कोशिश  बिना दिशा के चलने वाले नौका के समान होगी || ऐसे नौका का नाविक बस पतवार चलता रहता है और नव किसी और तट पर जाए या वापस वही पंहुचा जाए जहाँ से वह चला था इसका उसे कोई पता नहीं रहता है |

“Goals are the fule in the furnace of achievement” .

अपना लक्ष्य तय करने के बाद ही व्यक्ति उस लक्ष्य के बारे में गंभीरता से प्रयास करने लगता है | बहुत से व्यक्ति अपने सामने बहुत बरा लक्ष्य रख कर स्वयं को उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए झोक देता है |

कई व्यक्ति लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं जब की कई असफल भी हो जाते हैं |

हमारा मानना है की अंतिम बरे लक्ष्य के अपेक्षा छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारण कर लेना चाहिए | मान लो कि आप किसी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति को दो वर्ष देना चाहते हैं| तो आप अपने 6 – 6 माह के छोटे लक्ष्य निर्धरण कर लें एवं स्वयं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाले समस्याओं एवं कठिनाईयों का स्वयं आकलन करें | अपने प्रयासों का विश्लेष्ण , समीक्षा एवं कमी का ज्ञान आप को अगले लक्ष्य में मददगार होगी ||

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कहानी –

धीरूभाई अम्बानी ( 300 रूपये से 7500 डॉलर का सफर )

28 दिसम्बर 1932 को धीरूभाई का जन्म मोढ वैश्य परिवार में गुजरात में हुआ था | उसके पिता एक अध्यापक थे | जब वे 16 वर्ष के थे तो येमन चले गए जहाँ उन्होंने मात्र 300 रूपये प्रति माह (A.Besse and co.)  पर काम किया | इस कम्पनी की डिस्ट्रीब्युटर बन जाने से , धीरूभाई इस कम्पनी के पम्प का कार्य देखने लगे |

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1958 में भारत वापस लौट आए एवं उन्होंने एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री की स्थापना की | धीरे धीरे अपनी निष्ठा एवं लगन से उन्होंने अपनी व्यवसाय को इतना बढ़ाया की लोग दांतों तले अंगुली दबाने लगे |

 

 

 

 

 

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