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सच्चा प्रेम

एक बार की बात है | नारद जी भगवान श्रीकृष्ण से बोले, प्रभु आपको तीन रानी तथा इतनी पटरानियाँ है, फिर भी आप सब से ज्यादा प्यार राधा जी को ही क्यों करते हैं | भगवान श्रीकृष्ण बोलें नारद समय आने पर पता चल जयेगा |

भगवान श्रीकृष्ण एक बार बिमार पर गये | वैधजी आये, और बोले अगर किसी नारी का चरण धोकर इनको पिला दिया जाए तो ये ठीक हो जायेगें | अब नारदजी जल की खोज में सबसे पहले रुक्मणिजी के पास जा कर सारी बातें बताई और अपनी चरण धोकर देने को कहा रूक्मिण जी बोली हे नारद, मैं ऐसा पाप कैसे कर सकती हूँ | मैं उन्हें अपने चरण धो कर कैसे पिला सकती हूँ | इस से तो मुझे पाप होगा |

अतः मैं ऐसा पाप नहीं कर सकती |

फिर नारदजी  ने अन्य – अन्य रानीयों तथा पटरानियों के पास जाकर गुहार किये  | किन्तु कोई भी ‘ऐसा पाप’ करने की हिम्मत न जुटा सकी|

फिर थका हारा नारद राधाजी के पास गये , और सारी बाते उन्हें सुनाई  | राधा सुनते ही रोने लगी, और झट उसने नारद जी के कहे अनुसार अपनी चरण धो नारदजी के कमण्डल में डाल दी | अब नारदजी  भगवान कृष्ण के पास आकर बोले भगवन मुझे अपने प्रश्नों का उत्तर मिल गया है

 

कि क्यों आप राधा जी से इतना प्यार करते हैं | सच में आपका और राधा का प्यार अनन्त है | अतः नारदजी भगवान श्री कृष्ण को प्रणाम कर वहां से लौट गये |

1 thought on “सच्चा प्रेम”

  1. Kalea says:

    This is a really inngllieett way to answer the question.

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