बुलंद हौसले वाले स्टीव जॉब्स

ग्लोबल आईटी वर्ल्ड में स्टीव की पहचान सनकी, जिद्दी, बड़बोला और अहंकारी लीजेंड-टेक्नोप्रिनर की है, लेकिन स्टीव ने जैसे अकेले अपनी मंजिल तलाश की और उसकी राहों को तराशा, वह बेमिसाल है..

कम्प्यूटर्स के संस्थापक स्टीव जॉब्स को उनकी कुंआरी मां ने जन्म के तत्काल बाद इस शर्त के साथ एक निर्धन दंपति को सौंप दिया था कि वे उन्हें ग्रेजुएट बनाएंगे। गोद लेने वाले मां-पिता ने स्टीव जॉब्स को स्कूली शिक्षा के बाद पोर्टलैंड के एक महंगे रीड कॉलेज में दाखिला दिलवाया, पर किताबी ज्ञान को गैरजरूरी मानते हुए स्टीव जॉब्स ने छह माह में ही कॉलेज छोड़ दिया और कैलिग्राफी (अक्षर बनाने की कला) कोर्स ज्वाइन कर लिया। उन दिनों घर से दूर कोक की खाली बोतलें बेचकर स्टीव जॉब्स ने खाने के पैसे जुटाए, तो अच्छे व सस्ते खाने के लिए मीलों पैदल चलकर हरे कृष्णा मंदिर पहुंचे। ड्रग एडिक्ट्स की संगत में फंसकर वे नशा करने लगे, पर बहुत जल्दी संभल गए।

सन् 1974 में स्टीव जॉब्स की इलेक्ट्रिक हेकर स्टीव वोजिया से मुलाकात हुई, जिनके साथ सन् 1976 में उन्होंने घर के गैरेज में प्रिटेट सर्किट बोर्ड्स बनाने के लिए एप्पल कम्प्यूटर की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने पर्सनल कम्प्यूटर (एप्पल-1) व एप्पल-2 बनाए, जिन्हें दुनिया भर में पसंद किया गया। दिसंबर 1980 में स्टीव जॉब्स ने एप्पल कम्प्यूटर को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बना दिया। मेकिनटोश (मेक) ने एप्पल को बड़ा ब्रेक दिया। माउस की मदद से क्रिएटिव डिवाइस की तरह काम करने वाला यह दुनिया का पहला पर्सनल कम्प्यूटर है। इसके सुंदर अक्षरों का रहस्य है स्टीव जॉब्स का कैलिग्राफी हुनर।

30 साल की उम्र में भाग्य ने स्टीव जॉब्स के पुरुषार्थ को फिर परखा। वे बोर्डरूम बैटल में हार गए और अपनी ही कंपनी से निकाल दिए गए। अपमान से आहत होकर उन्होंने सिलिकॉन वैली से पलायन करने की बजाय, साहस जुटाकर नई शुरुआत की। सन् 1985 में स्टीव जॉब्स ने नेक्स्ट की स्थापना की, जो सर्वत्र दिखने वाले दृश्य, क्लिकेबल ग्राफिक्स व ई-मेल में आडियो के लिए मशहूर हुई। वहीं उन्होंने पिक्सार एनिमेशन स्टूडियो के बैनर तले टॉयस्टोरी, बग्स ऑफिस हिट एनिमेशन फिल्में बनाईं।

सन् 1997 में एप्पल ने नेक्स्ट को खरीदा और स्टीव जॉब्स की सीईओ की हैसियत से वापसी हुई। दूसरी पारी में आईपोड (पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर), आई फोन (मल्टी परपज स्मार्ट फोन) और आईपेड (स्मार्ट फोन व लैपटॉप टेबलैट पीसी) के बाद हाल ही में आई क्लाउड जैसी डिवाइस बनाई। सन् 2009 में कैंसर से क्षतिग्रस्त लीवर ट्रांसप्लांट के बाद स्टीव जॉब्स ने कहा- मौत से मुलाकात हुई, तो मैंने जाना कि हमें जो समय मिला है, वह बहुत कम है। अत: हमेशा दिल की सुनें और वही करें, जो दिल कहे। 2क्1क् में फाइनेंशियल टाइम्स ने स्टीव को साल की खास शख्सियत घोषित किया।

एपल ने नोकिया को मात दी, ज्यादा स्मार्टफ़ोन बेंचे

द्वारा ज़ैक एप्स्टीन 7 छ्वह्वद्य 22ठ्ठस्र, 2011 ड्डह्ल 12:58क्करू 2040किसके नीचे फाइल किया गया: एपल, नोकिया, मोबाइल फ़ोन, स्मार्टफ़ोन

उसको चाहे कुछ टेक पंडितों ने काफी कोसा हो, लेकिन एपल के आईफोन की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। फ़ाईनैनशल टाईम्स के अनुसार एपल ने पिछले क्वार्टर में 20.34 मिलियन आईफोन शिप किये थे, जो पिछले क्वार्टर के 18 .7 मिलियन से काफ़ी अधिक है। रोचक बात यह है कि इसी क्वार्टर में नोकिया ने 16.7 मिलियन फोन  शिप किये जो एपल से ही नहीं, बल्कि नोकिया के ही पिछले साल के 24.2 मिलियन के आंकड़े से काफ़ी कम है। एपल के पास इस समय केवल दो फ़ोन हैं – आईफ़ोन 4 और आईफ़ोन 3त्रस् – फिर भी वह कमी और मुनाफे के मामले में विश्व की सबसे ज्यादा फ़ोन बेचनेवाली कंपनी बन गया है। लेकिन यह पहली बार है कि एपल ने नोकिया से ज़्यादा फ़ोन बेंचे हैं। समय भी कैसे बदलता है।

एप्पल के बॉस ने लिया एक डॉलर

दुनिया की प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल के प्रमुख स्टीव जॉब्स पिछले तीन साल से केवल एक डॉलर सालाना वेतन ले रहे हैं.

स्टीव जॉब्स 1997 में एप्पल से दुबारा जुड़े थे और कंपनी के आईफोन, आईपैड तथा आईपॉड जैसे कई प्रमुख उत्पादों को लाने का श्रेय उन्हें जाता है. कंपनी ने सूचना में कहा है, ”जॉब्स का कुल वेतन एक डॉलर प्रति वर्ष है. जॉब्स को 2003 के बाद से कोई इक्विटी अवार्ड भी नहीं मिला है.” जॉब्स ने 2008 तथा 2009 में भी एक डॉलर का वेतन लिया था.

वर्ष 2010 में जॉब्स को एक डॉलर वेतन के रूप में मिले, जबकि 2,48,000 डॉलर उन्हें निजी विमान के कारोबार उद्देश्य इस्तेमाल के लिए दिए गए.

उल्लेखनीय है कि एप्पल को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से दुनिया की सबसे अधिक मूल्यवान कंपनी माना जाता है. नस्दक में सूचीबद्ध एप्पल का बाजार पूंजीकरण सात जनवरी, 2011 को 308 अरब डॉलर से अधिक अधिक रहा.

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