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बुरी आदत को शूरुआत में ही त्याग दें !!

 

एक गरीब किसान अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था | वह जब भी अपने बेटे को आदत छोड़ने के लिए कहता उसका बेटा उसके बात को ध्यान नहीं देता था | बेटा सोचता था, न एक दिन एक दिन छोड़ दूँगा | किसान बार – बार समझता पर उसे कुछ फर्क नही पड़ता था |

किसान अपने बेटे से बहुत परेशान था | और दुखी होकर एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था | उसी समय एक महात्मा उधर से कहीं जा रहे थे | उन्हों किसान को परेशान देख कर पूछा क्या बात है तुम इतने  परेशान क्यों दिख रहे हो |

किसान ने कहा – महात्मा में अपने बेटे को लेकर परेशान हूँ | उसकी बुरी आदत को लेकर मैं परेशान हूँ | महत्मा ने उस किसान की बात सुनी और कहा , तुम अपने बेटे को कल सुबह बगीचे में लेकर आना  | अगले दिन सुबह पिता पुत्र बगीचे में पहुंचे | महात्मा जी ने बेटे से बोला – आइये हम दोनों बगीचे की सैर करते हैं और वो दोनों धीरे – धीरे आगे बढ़ने लगे |

चलते चलते महात्मा जी रुके और बेटे से एक पौधे की ओर इशारा करके कहा – क्या तुम इस छोटे से पौधे को उखाड़ सकते हो ? जी हाँ ! इस में कौन से बड़ी बात है और उसने आसानी से पौधे को उखाड़ दिया |

फिर वे दोनों आगे बढ़ने लगे और थोरी देर के बाद महात्मा जी ने थोड़े बड़े पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा – क्या तुम इसे भी उखाड़ सकते हो ?

बेटे को तो मानो ये सब मजाक लग रहा था | उसने थोरे मेहनत के बाद उसे भी उखाड़ दिया और मन ही मन खुश हो रहा था |

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फिर वे दोनों आगे बढ़ने लगे और कुछ देर के बाद महात्मा जी ने एक बड़े से नीम के पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा – बेटे क्या तुम इसे उखार सकते हो ?  बेटे ने कहा – ये कैसे हो सकता है !! हम इसे नही उखाड़ सकते हैं | महात्मा जी ने कहा – ठीक समझा तुम ने, तुम लाख मेहनत के बाबजूद भी इसे नहीं उखाड़ सकते हो और यही बात हमारे जीवन में भी होती है | जब हमें कोई बुरी आदत लग जाती है तो उसे शुरुआत में ही छोड़ देनी चाहिए नहीं तो उसे बाद में छोड़ना बहुत कठिन हो जाता है जैसे की इस नीम के पेर को उखाड़ना कठिन हो गया है | बेटे को मानो एक झटका सा लगा और उसने उसने अपनी सारी बुरी आदत को छोड़ने का निर्णय कर लिया |

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