बीरबल के किस्से ( बीरबल का न्याय )

 

श्यामलाल  एक वृध्द व्यक्ती था |  जीवन के अंतिम पड़ाव पर उसकी इच्छा हुई कि वह तीर्थयात्रा पर जाए, उसने अपने जीवनभर की कमाई में से कुछ अशर्फियाँ रखकर शेष अपने एक युवा मित्र रामलाल को सौंप कर  कहा – रामलाल मैं एक तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूँ |

 

अब एक साल बाद ही लौटूंगा , तब तक तुम मेरी यह अशर्फियाँ अमानत के रूप में रखो | और यदि मैं न लौटूं तो तुम मेरा यह धन किसी नेक काम में खर्च करदेना |

आप बेफिक्र रहे आपका यह धन मेरे पास महफूज रहेगा | जब आप लौटेंगे तो वापस मिल जाएगा | रामलाल ने जबाब दिया | श्यामलाल चला गया ….|

 

पीछे रामलाल की नियत खराब हो गई उसने अशर्फीयों को डकार लेने का फैसला लिया |

एक वर्ष बाद जब श्यामलाल वापस आया और रामलाल से अपनी अशर्फियों को वापस माँगा तो उसने श्यामलाल को पहचानने से इंकार कर दिया |श्यामलाल ने कितना मिन्नतें की किन्तु रामलाल साफ इंकार कर दिया |

श्याम लाल मन मारकर रह गया उसके जीवन भर की कमाई उसके मित्र ने लुट ली | उसे यकीन नहीं हो रहा था किन्तु हकीकत उसके सामने थी |

उसने भी सोंच लिया वह रामलला को सबक सीखाएगा , वह तुरंत राजा अकबर के दरबार गया और राजा से शिकायतें की |

राजा ने जब रामलाल को दरवार में पेश किया तो वह मुकर गया | श्यामलाल इस मामले में न गवाह पेश कर सका और न ही कोई सबूत |

बादशाह अकबर ने फैसले के लिये बीरबल को नियुक्त किया | क्यों श्यामलाल जब तुमने अशर्फियाँ दी तो वहां कोई गवाह नहीं था क्या ? बीरबल ने पूछा |

हुजुर कोई गवाह नहीं थे सिर्फ आम के वृक्ष के नीचे मैंने रामलाल को अशर्फियाँ दी | श्यामलाल ने जबाब दिया |

“ तब तो आम का पेड़ गवाह हुआ न , जाओ आम के पेड़ से जाकर कहो  की दरबार में आकर गवाही दे | अगर न माने तो उस से मिन्नते करना तब भी न माने तो उसे राजा द्वारा कटवा देने की धमकी देना जाओ |”

श्यामलाल वहाँ से मायूस होकर चला गया , पेड़ भी भला गवाही दे सकता है क्या ? श्यामलाल मन ही मन सोंच रहा था |

 रामलाल दरबार में ही बैठा था , बीरबल ने रामलाल से कुछ इधर उधर की बातें करना शुरू कर दी |

अचानक ही बातों बातों में बीरबल ने रामलाल से पूछ श्यामलाल वहाँ पहुँच गया होगा ना ? “ नहीं हुजुर, अभी नहीं पहुँचा होगा , वह पेड़ यहाँ से दूर है , वहाँ पहुंचने का रास्ता भी साफ नहीं है और श्याम लाल तो वृध्द है उसे तो और भी समय लगेगा , रामलाल ने जबाब दिया |

बीरबल ने रामलाल से कुछ नहीं कहा बस चुपचाप श्यामलाल की इंतजार करने लगा |

काफी देर के बाद जब श्यामलाल वापस आया तो कहा- हुजुर मैंने तो पेड़ से कहा परन्तु उस पर कुछ असर ही नहीं हुआ …. अब मेरा क्या होगा मैं तो लुट गया ||

“तुम चिन्ता मत करो पेड़ आया था और गवाही भी दे गया व भी तुम्हारे पक्ष में” बीरबल ने कहा |

पेड़ गवाही दे गया पर कब …… रामलाल ने आश्चर्य से पूछा |

तुम्हारी चोरी पकड़ी गई है रामलाल , जब मैंने कहा था की श्यामलाल पेड़ तक पहुँच गया होगा तो तुमने कहा की अभी नहीं पहुँचा होगा ….और तुम ये भी जानते थे की ये पेड़ कितने दुरी पर है |

यदि तुम उस पेड़ के बारे में नहीं जानते तो आश्चर्य प्रकट करते | अतः इस से सिद्ध होती है कि अशर्फियाँ तुम ने ही ली है |

रामलाल डर गया और उसने स्वीकार कर लिया की अशर्फियाँ उसके पास ही है | उसने अपने मित्र की अशर्फियाँ लौटा दी और माफी मांग ली |

राजा अकबर बीरबल की न्याय से बहुत ही प्रसन्न हुए |

 

This entry was posted in हिंदी कहानियां. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*