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बकरी का बच्चा |

किसी जंगल में एक बकरी अपने दो छोटे – छोटे बच्चो के साथ रहती थी. एक दिन बकरी ने अपने दोनों बच्चो से बोली आज में जंगल में  घास खाने जा रही हूँ. तुम दोनों यही पर रहना किन्तु बकरी का छोटा बच्चा बहुत ही नटखट था. वह बकरी के पीछे पीछे छुपते – छुपते अपनी माँ के साथ जाने लगा थोरे दूर जाने पर बकरी को एक पुल पार करना था. माँ तो पुल पार कर  ली किन्तु छोटे  बच्चों को पुल पर करने में कठिनाई हो रही थी.सो वह उस जंगल में अपनी माँ के पीछे जाने का रास्ता खो गया कुछ दूर जाने पे उस बकरी के बच्चों को एक भेरिया दिखा| वह भागना  चाहा किन्तु भाग नहीं पाया .भरिया ने जब बकरी के बच्चों को देखा तो उसके मन में खाने का  लालच हो गया वह उस बच्चा के पास आया और बोला, वाह कितना अच्छा आहार आज मुझे प्रभु ने भेजा इस बच्चे के मुलायम – मुलायम   मांस से में आपना पेट भर लेता हूँ|  यह सुनते ही वह नन्हा बकरी का बच्चा बरे ही उत्सुक हो कर बोला भेरिया मामा  मेंरी माँ कहती है , की आप बरे अच्छे गाना गाते हो, क्यों न आप पहले मुझे एक गाना सुना दो फिर मुझे खा लेना, भेरिया ने सोचा यह बच्चा अभी छोटा हैं कुछ समझता नहीं है. चलो इसकी आखरी इच्छापूरी करके ही इसे खाता हूँ. भरिया ने बड़े  ही भाव से आपनी दोनों आँख बंद कर के गाना शुरु किया. बस क्या था, बकरी का बच्चा अपनी जान बचा के भाग निकला. जब भेरिया ने अपनी आँख खोली तो देखा की बकरी का बच्चा वहा नहीं था. वह तो भागते – भागते आपने घर आ गया , और सारी बाते अपने बड़े भईया को बताया | उसके भाईने  बोला की तूने  माँ को बिने बताये ही चला गया था | जिसके कारण इतना कठिनाई का सामना करना पड़ा, अब से ऐसी गलती कभी मत  करना |    

        (( शिक्षा => वैसे तो यह कहानी बच्चो के मनोरंजन के लिए हैं  , किन्तु इस कहानी से हमें बहुत बड़ी शिक्षा मिलती हैं, की परिस्थीती चाहे कोई भी हो हम अपने बुद्धि के बल पर हर मुस्किल का सामना कर सकते हैं | ))             

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1 thought on “बकरी का बच्चा |”

  1. Ladainian says:

    Your post has litefd the level of debate

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