प्यारी सुलो |

सुलेखा को अपनी सौतेली माँ के ताने बहुत झेलने परते थे| किन्तु वह कभी घबराती नहीं थी। सुलेखा कॉलेज जाने से पहले घर के सारे कार्य को वह निपटा के ही जाती थी और आने के बाद भी निपटाती थी।  मानब सुलेखा से बहुत प्यार करता था सुलेखा यह बात नही जानती थी।  उसे तो बस हमेसा अपनी माँ का डर बसा रहता था। सुलेखा का एक सौतेला भाई राजीब जो हमेसा आवारा गर्दी में आगे की ओर बढ़ता गया किंतु उस की माँ उसे नज़र अंदाज़ करती गई।  एक दिन सुलेखा की सादी का चर्चा उस के पिता ने चलाई तो माँ झीज्ज्कते हुए बोली अपनी लाडली को किसी राजकुमार से सादी करोगे तो सारी प्रॉपर्टी बेचने पड़ेगी जो मै अपने बेटे राजीव के नाम कर चुकी हूँ जिस पर तुम्हारा कोइ अधीकार नही हैं। जा किसी लंगरे लुल्हे को ला कर बेटी की सादी कर दे। पिताजी बहुत चिंतित हुये।

एक दिन मानव की माँ बहुत ज़ोर बीमार पर गई,  अब उन्हें पेट का ऑपरेशन कराना परा था| उन्हें देखने सारे मानव के साथी गये सुलेखा भी सोची आज कॉलेज के वक्त मानव की माँ को देख आती हूँ।

वह मानव के साथ हॉस्पिटल देखने चली गई रास्ते में मानव अपनी मन की बात कहना चाहता था किन्तु कह नही सका| अब माँ के पास जाकर मानव बोला माँ यह सुलेखा हैं, जैसी देखने में हैं वेसा गुण भी|

माँ सारी बात समाझ गई।  माँ को लड़की में सब गुण मजूद दिखा जैसी उसकी माँ बहुत चाहती थी।

इधर सुलेखा का भाई राजीव अपनी माँ को इधर उधर का बहाना बना कर खूब पैसा बर्बाद करता गया। अब माँ के सिर पर सुलेखा को भागने का धुन सबार हो चूका था, ओ दिन रात पति से झगर ती, इसे सादी करबा दो।  इसी दौरान मानव के पिता ने सुलेखा की सादी मानव के साथ करबा  कर अछी बहु घर लाया।

अब सुलेखा अपने सास-ससुर एवं पति को खूब मन से सेवा और प्यार करती रही।  धिरे धिरे समय एेसा आया राजीव को रेलवे की नौकरी मिल गई ओ अपने पति अौर सास-ससुर के साथ खुसी से रहने लगी।

 

निष्कर्ष :- अगर आप में अच्छे गुण है तो आप कहीं और किसी के साथ खुशी से रह सकते हैं।

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