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पंचतंत्र की कहानी

एक समय की बात है | किसी गाँव में गाय, खरगोश, बकरी, और गधा, और  घोड़ा इन पाँच जानवरों  में काफी मित्रता थी | वे एक साथ एक ही मैदान में  रोज चरने के लिए आते थे | इन सब जानवरों में सबसे छोटा और सबका नन्हा दोस्त था खरगोश | खरगोश का पेट तो थोड़े ही घास से भर जाता था  | बाकी सभी जानवरों को तो ज्यादा घास चाहिए होता था इसलिए खरगोश अपना पेट भरने के बाद सभी जानवरों के साथ खूब खेला करता था |वो कभी घोड़ा की पूंछ पकड़ कर उसके पीठ पर बैठ जाता था |तो कभी बकरी के कान को पकड़ कर खिंचता| तो कभी गधा के कानों को खिंचता गाय की पूंछ, तो उसके लिए झुला था मानों जब भी मन नही लगता तो गाय की पूंछ पकड़ कर झुला झूलने लगता | एक दिन की बात हैं | उस इलाके में एक कुत्ता आ गया और जैसे ही उसने खरगोश को देखा की उसका शिकार  करने के  लिए  दौरा उस दिन तो खरगोश भाग गया लेकिन वो कुत्ता अब उसक शिकार करना चाहता था | और जब भी उसे देखता उसको मारने के लिए दोड़ता | खरगोश बेचारा बहुत दर डर गया और उस मैदान में आना छोड़ दिया | अब न तो वो अपने मित्रो से मिल पाता था | और न ही उसके मित्र उससे | जब कुछ दिन बीत गया तो एक दिन खरगोश डरते – डरते अपने मित्रो से मिलने गया | उसे देखते ही सब जानवर उससे पूछने लगे की खरगोश भाई अब तुम क्यों नही आते हो हमे भूल गए क्या ? खरगोश बोला नही मित्रो में तुम्हे कैसे भूल सकता हु | पर तुम लोग ने ध्यान नही दिया की एक कुत्ता कुछ दिन से मेरे पीछे पड़ा है | वो मेरा शिकार  करना चाहता है | इस डर से में अब यहाँ नही आता हु | तुम लोग ही मेरी मदत करो उसने पहले घोड़े से पूछा घोड़ा भाई आप तो बहुत हट्टे – कट्टे हो |जब वो कुत्ता आये तो आप उसे अपने टापों से मार देना फिर मुझे किसी से डरने की जरुरत ही नही होगीं | इसपर घोडा बोला नही खरगोश माफ़ करना मुझे तो बस दोड़ना आता है टाप तो में बस रुकने के लिए मारता हु | अगर वो शिकारी कुत्ता मेरे एक टाप से बच गया तो मुझे काट लेगा | मुझे माफ़ कर दो मित्र | फिर खरगोश गधे के पास गया और बोला गधा भाई आप ही मेरे इस संकट की समय में मदद कर सकते हो आप तो लात मरने में माहिर हो जैसे हे वो कुत्ता मेरे पीछे भागे तो आप उसे ऐसा लात मारो की वो बेहोस हो जाये फिर क्या सब जानवर  मिलके उसे पूरा मार देंगे | इसपर गधा बोला मित्र में तो भला गधा बस लोग मुझसे कम करवाना जानते है और मारना जानते है | में  उस कुत्ते का क्या कर सकता हु अगर वो कुत्ता मेरे एक लात मरने पर भी नही बेहोस हुआ तो वो मुझे मार ही डालेगा | मुझे माफ़ कर दो दोस्त | खरगोश बहुत दुखी मन से गाय के पास गया और बोला गाय अब आप ही मेरे मदत करो आप के सिंग बहोत नुकीली है आप अपने सिंग से उस कुत्ते का पेट फार  दो | गाय बोली मुझे बहुत दुःख हो रहा है पर मुझे माफ़ कर दो मेरे मित्र मेरे सिंग बहुत निखिले है | पर मुझसे उस कुत्ते को मारे नही होगा क्यों की मुझे कुत्तो से बहुत डर लगता है | में अगर लायक रहती तो कुछ मदत  करती माफ़ कर दो दोस्त | खरगोश को अब कोई उम्मीद नही लग रही थी बचने की एक उम्मीद बस बकरी ही उसे बचा सकती है | लेकिन जब वो बकरी के पास गया तो बकड़ी बोली की जब घोडा, गधा, गाय, जैसे बरे जानवर उस खरगोश का कुछ नही बिगार सकते तो मेरी क्या मजाल की में कुत्ते से भीरु | अब खरगोश बहुत दुखी हुआ | अब क्या करे फिर उसने सोचा की क्यों न खुद पे भरोसा किया जाये | और पहले दिन की भाती अपने पीछे के दो बारे पैरो के बल पर भाग गई वैसे ही बाद में भी जब वो कुत्ता आएगा में भाग जाऊंगा बस और ऐसा ही हुआ अब रोज खरगोश अपने दोस्तों के साथ घास चरने लगा खेलने   लगा और जैसे उस शिकारी कुत्ते को देखता की भाग जाता कुछ दिन तो वह कुत्ता उसका पीछा किया लेकिन जब समझ गया में खरगोश का शिकार नही कर सकता तो उसका  पीछा  करना छोड़ दिया | और वो पाँच मित्र पहले की तरह ख़ुशी – ख़ुशी रहने लगे

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1 thought on “पंचतंत्र की कहानी”

  1. Anjii says:

    That’s cleared my thoughts. Thanks for conritbuting.

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