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तो ये थे महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहे गोपाल कृष्ण गोखले महान स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे. उन्होंने गांधी जी को देश के लिए लड़ने की प्रेरणा दी. वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु थे.

अंग्रेजों के अत्याचार पर भारतीयों को कोसते हुए उन्होंने कहा कि तुम्हें धिक्कार है, जो अपनी मां-बहनों पर हो रहे अत्याचार को चुप्पी साधकर देख रहे हो. इतना तो पशु भी नहीं सहते.

जानें उनसे जुड़ी 10 बातें –

1. गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 को महाराष्ट्र के कोहट में हुआ था. उनके पिता क्लर्क कृष्ण राव पेशे से क्‍लर्क थे.

2. पढ़ाई के दौरान अच्‍छे प्रदर्शन के लिए उन्हें सरकार की ओर से 20 रुपये की छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हुई थी .

3. शिक्षा के प्रति उनका झुकाव शुरू से था जिसके चलते उन्‍होंने भारतीय शिक्षा को विस्‍तार देने के लिए सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्‍थापना की.

जब साउथ अफ्रीका में गांधी से हुई मुलाकात

4. उन्होंने इस कालेज में शिक्षण के साथ ही आजादी के लिए राजनीतिक गतिविधियां भी चलाईं.

5. उनका मानना था कि स्‍वतंत्र और आत्‍मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा और जिम्‍मेदारियों का ज्ञान जरूरी है.

6. गोपाल कृष्ण गोखले भारतीय राष्‍ट्रीय क्रांगेस के जाने-माने चेहरे थे. उन्‍होंने लगाता ब्रिटिश सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई. अपनी प्रतिभा के दम पर वे आगे चलकर जननेता के रूप में प्रसिद्ध हुए.

7. उन्‍होंने जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ भी आंदोलन चलाया था. 1912 में गांधी जी के आमंत्रण पर वह खुद भी दक्षिण अफ्रीका गए और वहां जारी रंगभेद का विरोध किया.

प्रेरणादायक नेता थे गोपाल कृष्ण गोखले

8. गांधी जी ने अपनी आत्‍मकथा में गोखले को अपना राजनीतिक गुरु बताया था. लेकिन वह सिर्फ राष्ट्रपिता ही नहीं बल्कि मोहम्मद अली जिन्ना के भी राजनीतिक गुरु थे.

9. अंग्रेजों के अत्‍याचार पर भारतीयों से कड़े शब्‍दों में उन्‍होंने कहा था ‘तुम्‍हें धिक्‍कार है, जो अपनी मां-बहन पर हो रहे अत्‍याचार को चुप्‍पी साधकर देख रहे हो. इतना तो पशु भी नहीं सहते हैं.’

10. उनका निधन 19 फरवरी 1915 को हुआ.

 gopal krishna gokhale

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