चित्रकार की कलाकारी

 

कोई डेढ़ हजार वर्ष पहले चीन के राजा ने सारे राज्य के चित्रकारों को खबर की कि वह एक राज्य की मुहर बनाना चाहता है | मुहरे पर बांग देते हुए मुर्गे का चित्र रहेगा | जो चित्रकार सबसे बढियां चित्र बनाएगा | और जिसका चित्र सबसे जीवंत रहेगा | उसे बड़े पुरुस्कार दिए जाएगे तथा राज्य का कलागुरु भी नियुक्त किया जाएगा | देश के दूर – दूर कोने से श्रेष्ठतम चित्रकार, बोलते हुए मुर्गे का चित्र बनाकर उपस्थित हुए | हजारों चित्र आए थे | राज्य में एक बूढा कलाकार था | राजा ने उसे नियुक्त किया की वह चुनाव करें की सबसे श्रेष्ठ चित्र कौन – सा है |

उस चित्रकार ने उस हजारों चित्रों को एक बड़े भवन में बंद कर दिया और स्वयं भी बंद हो गया | शाम होते- होते उसने खबर दी कि एक भी चित्र ठीक नही है ! सभी चित्र कुछ ना कुछ गलती है ! राजा इस बात से हैरान हो गये | राजा ने कहा की तुम्हारा मापदंड क्या हैं तुम ने किस भांति जांचा कि चित्र ठीक नहीं है |

उसने कहा मापदंड एक ही हो सकता था | मैंने मुर्गे से जाँच करवाया | मैं चित्रों के पास एक जिन्दा मुर्गा को ले गया और उसने उस चित्र के मुर्गे को पहचाना भी नहीं ! अगर वे मुर्गा जीवंत होते तो उसे देख कर मुर्गा घबराता बंग देता और देख कर भागता जैसा कि वह दुसरे मुर्गे के साथ करता है | इस बात को सुनकर राजा ने कहा – यह तो बड़ी मुसीबत हो गयी |  राजा ने कहा – फिर तो अब तुम ही चित्र बनाओ | बूढ़े ने कहा इस बुढ़ापे में मुर्गे का चित्र बनाना बहुत कठिन बात है | राजा ने कहा तुम इतने बड़े कलाकार हो फिर एक मुर्गे का चित्र नहीं बना सकोगे ?

कुछ भी करो लेकिन चित्र बनाओ | बूढ़े ने कहा तीन वर्ष लग जाएगा | राजा ने कहा ठीक है, उसे तीन वर्ष के लिए राजधानी की तरफ से व्यवस्था कर दी गई | वह बूढा जंगल की तरफ चला गया | छह महीने बाद राजा ने लोगों को भेजा की पता लगाओ उस चित्रकार का क्या हुआ | लोग गये वह बुढा जंगल में मुर्गे के बीच बैठा हुआ था | सभी देख कर वापस आ गए |

जब तीन वर्ष बीत गया तो वह बुढा व्यक्ति दरवार में आया | राजा ने उसकी स्वागत की उसके बाद चित्र बनाने को कहा – उस बूढ़े ने पुरे जीवंत चित्र बना दिया | ठीक वैसे जैसे जीवत मुर्गे होते हैं |

राजा ने कहा क्या जादू किया है इस चित्र में तुमने क्या किया | बूढ़े ने कहा – किसी चीज को जीवंत बनाने के लिए बहुत अधिक परिश्रम की आवश्यता होती है | इस चित्र को जीवंत बनाने के लिए पहले अपने आप को मुर्गा बनाना जरुरी था , तभी मैं मुर्गे को निर्मित कर सकता था | मुझे मुर्गे के भीतर से जानना परा की आखिर यह क्या होता है , और जब तक की मैं आत्मसात न हो जाऊ तब तक कैसे जान सकता हूँ कि इसके भीतर क्या है | उसकी आत्मा क्या है |

यही बात हर एक चीज में होती है | चाहे वह सवाल मुर्गे का ही क्यों ना हो | आत्मा को एक किये बिना , जीवन तथा  प्राण के आत्मा को नहीं जना जा सकता है | जीवन का प्राण ही प्रभु है | वही सत्य है | जीवन के साथ एक हुए बिना किसी को जानना असम्भव है | अतः इन सब कार्य के लिए मुझे तीन वर्ष का समय लगा | राजा उस बूढ़े के बात से एवं इसके चित्र से बहुत अधिक प्रभावित हुए | एवं उस राज्य के कला और ज्ञान विज्ञान का पद उसे दे दिया |

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