गुरु और शिष्य

दोस्तों एक बार एक गुरु आपने शिष्य के साथ कहीं से गुजर रहे थे, चलते – चलते वह एक खेत के पास पहुंचे खेत बहुत उपजाऊ थी | पर उस खेत की हालत देख कर लगता थी की उस खेत का मालिक उस पर ध्यान नहीं देता, पुरी तरह से उजार हालत थी उस खेत की खैर, उन दोनों को बहुत प्यास लगी थी,   तो उसने खेत के बीच बने एक घर में पहुंचे दरबाजा खटखटाया तो देखा कि घर से एक व्यक्ती निकला उसके साथ उसकी बीबी और बच्चे थे | उसने पानी माँगा तो उस व्यक्ती ने उसे पानी पिलाया , फिर उस गुरु ने उस व्यक्ती से पूछा की भाई आखिर आपका गुजारा चलता कैसे है , तो पूछने पर उस व्यक्ती ने बोला की हमारे पास एक भैंस है, जो जिसके दूध से हमारा गुजारा चलता है चुकी शाम काफी हो चुकी थी , इसलिय गुरु और शिष्य ने  रात भर उन्ही रहने की सोंची , रात में जब सारे लोग सो गये तो गुरु ने शिष्य को उठाया और बोला चलो – चलो पर चलने से पहले मुझे उस भैंस को मारनी है, शिष्य को ऐसा करने का जरा भी मन न था पर गुरु की आज्ञा से उसने भैंस को पहारी से गिरा कर मार डाला | फिर वे दोनों रातो रात वहां से चले गये | कुछ वर्षो बाद वह जब शिष्य एक बरा आदमी बन गया तो आपनी गलती का  पश्चताप करने के लिये वह आपनी कर से वहां पहुंचा, तो देखा की जंहा वह उस किसान का घर था उस जगह पर एक बरा सा मकान था , और उस बंजर खेत  के पास एक बहुत बरा फल का बगिचा था, उसे लगा की शायद यह सब किसी और आदमी का है , पर उसे खेत में वहीआदमी दिखाई दिया , जब वह  शिष्य उस आदमी से मिला तो बोला की शायद आप मुझे पहचाना नहीं तो उस आदमी ने कहा की नहीं नही में आपको कैसे भूल सकता हूँ | आप लोग तो उस रात वहां से चले गये लेकिन मेरी भैंसे न जाने कैसे पहारी से गिरकर मर गयी |  फिर मैने बहुत पश्च्याताप किया लेकिन , बाद में फिर उस खेत में गया जो की बंजर बन गयी थी | बहुत मेहनत के बाद उसे उपजाऊ बनाया हमने खुब मेहनत की और आज इस हाल में पहुंचे हैं | उस समय शिष्य को अपने गुरु की  सारी बातें समझ में आयी |

शिक्षा => दोस्तों हम भी कई बार परिस्थियों के इतना आदी हो जाते है की उसी में जीना शुरु कर देते हैं| हमें अपनी छमता का ज्ञान ही नहीं रहता , हम जितना सोंचते हैं उससे कही ज्यादा कर सकते हैं |

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