खेत में गड़ाधन

 

सुन्दरपुर गाँव में रामदीन नाम का एक किसान रहता था |

उसके चार बेटे थे | रामदीन स्वंय तो परिश्रमी था , पर उसके चारो बेटे बहुत आलसी थे |

हर समय इधर उधर बैठ कर समय बर्बाद किया करते थे | उस चारों को देख कर रामदीन बहुत परेशान रहता था |

एक दिन उन्होंने अपने चारों बेटे को बुलाकर कहा – “ मैं और तुम्हारी माँ अब बूढ़े हो गये हैं | हम दूर तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं | मैंने खेत में धन गाड़कर छिपा रखा है | यदि कोई जरूरत पड़े तो निकाल लेना |”

धन की बात सुनकर उन्होंने पिता जी को ख़ुशी ख़ुशी जाने को कह दिया |

रामदीन के जाने के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था पर उसके बाद पास  धन समाप्त हो गया |

अब उन्हें खेत में गड़ा धन याद आया | उन चारों भाइयो ने खेत की खुदाई का काम शुरु कर दिया , वे दो तीन दिन तक पूरा खेत खोदते रहे पर उन्हें कहीं कुछ न मिला | वे चारो निराश और परेशान होकर घर लौट रहे थे , तभी उन्हें रामदीन के परम मित्र हरिनाथ मिले | उन्होंने पूछा तुम सब परेशान क्यों हो ?

कारण जानने के बाद हरिनाथ ने सलाह देते हुए कहा , “जब तुम चारों ने खेत खोद ही लिया है,  तो उस में बीज बो दो |”

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उन्होंने ऐसा ही किया | खेत में नन्हे –नन्हे अंकुर निकल आए | उन चारो के मन में उत्साह जाग गया |

वे उसकी देख भाल करने लगे | कुछ दिन बाद फसल आ गई |

वे हरिनाथ चाचा को धन्यवाद देकर फसल को बचने की तैयारी में बाजार ले जाने में जुट गये |

उसी समय रामदीन और उसकी पत्नी तीर्थ यात्रा से लौट आए |

अपने माता पिता के आते ही उन्होंने उनके चरण स्पर्श किये | फसल के आनाज के बोरे को देखकर रामदीन ने कहा – अब तुम्हे खेत में गड़े धन का राज समझ में आ गया |

उन चारो भाइयो ने ख़ुशी से कहा , “हाँ पिता जी”!

अब से हम सभी भी आपके साथ मेहनत करके धन कमायेगें |

 

 

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