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अवसरों को पहचानें…..

मित्रों, हम सभी के जीवन में कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं कि जिनमें हमारे जीवन को मोड़ देने की जबर्दस्त क्षमता होती है। अब यह हम पर है कि हम उस अवसर को पहचानकर उसका इस्तेमाल कर पाते हैं या नहीं।
अमिताभ बच्चन आकाशवाणी में ऑडिशन टेस्ट देने गए थे। वहां उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया, क्योंकि उनकी आवाज अच्छी नहीं थी। यह घटना उनके विरूद्ध थी, लेकिन बाद में पूरी दुनिया उनकी उसी आवाज़ की कायल हुई, जिसे कुछ सालों पहले निरस्त कर दिया गया था। छह फुट से भी अधिक ऊँचा यह नायक बीसवीं सदी का महानायक बना, जिसकी यह कहकर खिल्ली उड़ाई गई थी कि ‘ये लम्बू हीरो बनने आया है।‘ महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से निकालकर स्टेशन पर क्या फेंका गया कि उन्होंने फैसला कर लिया कि ‘मैं अंग्रेजी को हिन्दुस्तान से बाहर फेंक दूँगा।‘
इन उदाहरणों के जरिए मैं आपसे कहना केवल यह चाह रहा हूं कि अवसर का कोई रंग-रूप् नहीं होता। यह कहकर नहीं आते और बताकर जाते भी नहीं हैं। ये तो केवल आपके ऊपर है कि आपका एंटीना, आपका रिसीवर कितना जबर्दस्त है कि वह इन अवसरों को देख लेता है, समझ लेता है और उन्हें पकड़ भी लेता है।

 

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