श्री हनुमान चालीसा

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरणकमलों की धूलि
से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर
के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो चारों फल धर्म ,
अर्थ , काम और मोक्ष को देने वाला है।
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।
《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन
करता हूँ। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और
बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल , सदबुद्धि एवं
ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर
दीजिए।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, 
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥
《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो।
आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर!
आपकी जय हो! तीनों लोकों स्वर्ग लोक , भूलोक
और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दूत अतुलित बलधामा, 
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ॥2॥
《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन!
आपके समान दूसरा बलवान नही है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
महावीर विक्रम बजरंगी, 
कुमति निवार सुमति के संगी ॥3॥
《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष
पराक्रम वाले हैं। आप खराब बुद्धि को दूर करते हैं
और अच्छी बुद्धि वालो के साथी , सहायक हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
कंचन बरन बिराज सुबेसा, 
कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥4॥
《अर्थ》→ आप सुनहले रंग , सुन्दर वस्त्रों , कानों
में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, 
काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥5॥
《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है
और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
शंकर सुवन केसरी नंदन, 
तेज प्रताप महा जग वंदन ॥6॥
《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन!
आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे
वन्दना होती है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
विद्यावान गुणी अति चातुर, 
राम काज करिबे को आतुर ॥7॥
《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान हैं।
गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्रीराम
काज करने के लिए आतुर रहते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, 
राम लखन सीता मन बसिया ॥8॥
《अर्थ 》→ आप श्री रामचरित सुनने मे आनन्द
रस लेते हैं।श्री राम , सीता और लखन आपके हृदय
मे बसे रहते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, 
बिकट रुप धरि लंक जरावा ॥9॥
《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण
करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप
करके लंका को जलाया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भीम रुप धरि असुर संहारे, 
रामचन्द्र के काज संवारे ।।10॥
《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके
राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों
को सफल कराया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
लाय सजीवन लखन जियाये, 
श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥11॥
《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मण
जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर
आपको हृदय से लगा लिया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, 
तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥12॥
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा
की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, 
अस कहि श्री पति कंठ लगावैं ॥13॥
《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर
हृदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजार मुख
से सराहनीय है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, 
नारद , सारद सहित अहीसा ॥14॥
《अर्थ》→श्री सनक , श्री सनातन , श्री सनन्दन ,
श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी ,
सरस्वती जी , शेषनाग जी सब आपका गुण गान
करते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, 
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥15॥
《अर्थ 》→ यमराज , कुबेर आदि सब दिशाओं
के रक्षक , कवि , विद्वान , पंडित या कोई भी आपके
यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, 
राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥16॥
《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से
मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, 
लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥
《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने
पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने। इसको
सब संसार जानता है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, 
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥18॥
《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि
उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार
योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा
फल समझ कर निगल लिया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, 
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥19॥
《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी
मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया। इसमें कोई
आश्चर्य नही है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
दुर्गम काज जगत के जेते, 
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥20॥
《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन
काम हो वो आपकी कृपा से सहज हो जाते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दुआरे तुम रखवारे, 
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप
रखवाले हैं जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को
प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना
राम कृपा दुर्लभ है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, 
तुम रक्षक काहू.को डरना ॥22॥
《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते हैं
सभी को आन्नद प्राप्त होता है और जब आप
रक्षक हैं तो फिर किसी का डर नही रहता।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आपन तेज सम्हारो आपै, 
तीनों लोक हाँक ते काँपै ॥23॥
《अर्थ. 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई
नही रोक सकता। आपकी गर्जना से तीनों लोक
काँप जाते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, 
महावीर जब नाम सुनावै ॥24॥
《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम
सुनाया जाता है वहाँ भूत , पिशाच पास भी नही
फटक सकते।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
नासै रोग हरै सब पीरा, 
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥
《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर
जप करने से सब रोग चले जाते हैं और सब पीड़ा
मिट जाती है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट तें हनुमान छुड़ावै, 
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥26॥
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे ,
कर्म करने मे और बोलने मे जिनका ध्यान आपमे
रहता है उनको सब संकटो से आप छुड़ाते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब पर राम तपस्वी राजा, 
तिनके काज सकल तुम साजा ॥ 27॥
《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे
श्रेष्ठ हैं। उनके सब कार्यो को आपने सहज मे ही
कर दिया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और मनोरथ जो कोइ लावै, 
सोई अमित जीवन फल पावै ॥28॥
《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो वह कोई
भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है
जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
चारों जुग परताप तुम्हारा, 
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥29॥
《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग , त्रेता , द्वापर
तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है।
जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
साधु सन्त के तुम रखवारे, 
असुर निकंदन राम दुलारे ॥30॥
《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप सज्जनों
की रक्षा करते हैं और दुष्टों का नाश करते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, 
अस बर दीन जानकी माता ॥31॥
《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा
वरदान मिला हुआ है जिससे आप किसी को भी
आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते हैं।
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई
नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश
कर जाता है।
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा
बना देता है।
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे
जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का
बन जाता है।
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति
होती है।
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी
मे समा सकता है। आकाश मे उड़ सकता है।
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय
हो जाता है।
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम रसायन तुम्हरे पासा, 
सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥
《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण
मे रहते हैं जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य
रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरे भजन राम को पावै, 
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥
《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री रामजी
प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते हैं।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अन्त काल रघुबर पुर जाई, 
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥34॥
《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम
को जाते ध् और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति
करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और देवता चित न धरई, 
हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥35॥
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने
से सब प्रकार के सुख मिलते हैं फिर अन्य किसी
देवता की आवश्यकता नही रहती।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट कटै मिटै सब पीरा, 
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥36॥
《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका
सुमिरन करता रहता है उसके सब संकट कट जाते
हैं और सब पीड़ा मिट जाती है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय जय जय हनुमान गोसाईं, 
कृपा करहु गुरु देव की नाई ॥37॥
《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय
हो , जय हो , जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु
जी के समान कृपा कीजिए।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो सत बार पाठ कर कोई, 
छुटहि बँदि महा सुख होई ॥38॥
《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का
सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा
और उसे परमानन्द मिलेगा।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, 
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥39॥
《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान
चालीसा लिखवाया इसलिए वे साक्षी है कि जो
इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुलसीदास सदा हरि चेरा, 
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥40॥
《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास
सदा ही श्री राम का दास है इसलिए आप उसके
हृदय मे निवास कीजिए।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार!
आप आनन्द मंगलो के स्वरुप हैं।  हे देवराज!
आप श्रीराम , सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे
हृदय मे निवास कीजिए।
Posted in पूजन विधि, पूजन विधि | Leave a comment

एक कड़वी सच्चाई

*नदी तालाब में नहाने में शर्म आती है,
और
स्विमिंग पूल में तैरने को फैशन कहते हैं.*
गरीब को एक रुपया दान नहीं कर सकते,
और
वेटर को टिप देने में गर्व महसूस करते हैं.
*माँ बाप को एक गिलास पानी भी नहीं दे सकते,
और
नेताओं को देखते ही वेटर बन जाते हैं.*
बड़ों के आगे सिर ढकने में प्रॉब्लम है,
लेकिन
धूल से बचने के लिए ‘ममी’ बनने को भी तैयार हैं.
*पंगत में बैठकर खाना दकियानूसी लगता है,
और
पार्टियों में खाने के लिए लाइन लगाना अच्छा लगता है.*
*बहन कुछ माँगे तो फिजूल खर्च लगता है,
और
गर्लफ्रेन्ड की डिमांड को अपना सौभाग्य समझते हैं.*
गरीब की  सब्ज़ियाँ खरीदने मे इन्सल्ट होती है,
और
शॉपिंग मॉल में अपनी जेब कटवाना गर्व की बात है.
*बाप के मरने पर सिर मुंडवाने में हिचकते हैं,
और
‘गजनी’ लुक के लिए हर महीने गंजे हो सकते हैं.*
कोई पंडित अगर चोटी रखे तो उसे एन्टीना कहते हैं.
और
शाहरुख के ‘डॉन’ लुक के दीवाने बने फिरते हैं.
.
*किसानों के द्वारा उगाया अनाज खाने लायक नहीं लगता,
और
उसी अनाज को पॉलिश कर के कम्पनियाँ बेचें, तो क्वालिटी नजर आने लगती है…॥*
ये सब मात्र अपसंस्कृति ही नही,
देश व समाज का दुर्भाग्य भी है ।
आपकी इच्छा हो तो शेयर करे।अन्यथा कोई कसम बंधन नही है।
वन्देमातरम
Posted in प्रेरणादायक, मुखपृष्ठ | Leave a comment

जीवन में हमेशा याद रखनी चाहिए

डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम की चन्द लाईनें जो हमे जीवन में हमेशा याद रखनी चाहिए। और हो सके तो उसे अमल भी करना चाहिये।

1. जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना,क्योक़ि बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।

2. किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है।

3. टूट जाता है गरीबी मे वो रिश्ता जो खास होता है, हजारो यार बनते है जब पैसा पास होता है।

4. मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।

5..जल्द मिलने वाली चीजे ज्यादा दिन तक नही चलती, और जो चीजे ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नही मिलती।

6. बुरे दिनो का एक अच्छा फायदा अच्छे-अच्छे दोस्त परखे जाते है।

7. बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की
तरह जाता है।

8. छोटी छोटी बातो मे आनंद खोजना चाहिए क्योकि बङी बङी तो जीवन मे कुछ ही होती है।

9. ईश्वर से कुछ मांगने पर न मिले तो उससे नाराज ना होना क्योकि ईश्वर वह नही देता जो आपको अच्छा लगता है बल्कि वह देता है जो आपके लिए अच्छा होता है।

10. लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।

11. ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हे तोङना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो अगर प्यास नही बुझा सकता वो आग तो बुझा सकता है।

13. अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

14. इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।

15. जब हम बोलना नही जानते थे तो हमारे बोले बिना ‘माँ’ हमारी बातो को समझ जाती थी। और आज हम हर बात पर कहते है छोङो भी ‘माँ’
आप नही समझोंगी।

16. शुक्र गुजार हूँ उन तमाम लोगो का जिन्होने बुरे वक्त मे मेरा साथ छोङ दिया क्योकि उन्हे भरोसा था कि मै मुसीबतो से अकेले ही निपट सकता हूँ।

17. शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

18. जिदंगी मे उतार चङाव का आना बहुत जरुरी है क्योकि ECG मे सीधी लाईन का मतलब मौत ही होता है।

19. रिश्ते आजकल रोटी की तरह हो गए है जरा सी आंच तेज क्या हुई जल भुनकर खाक हो जाते।

20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो खुद अच्छे बन जाओ आपसे मिलकर शायद किसी की तालाश पूरी हो।

Posted in प्रेरणादायक | Leave a comment

बिटिया 👧 अनमोल हीरा

मेहंदी रोली कंगन का सिँगार नही होता”’

रक्षा बँधन भईया दूज का त्योहार नहीं होता””

रह जाते है वो घर सूने आँगन बन कर””

जिस घर मे बेटियों का अवतार नहीं होता”’
जन्म देने के लिए माँ चाहिये,
राखी बाँधने के लिए बहन चाहिये,
कहानी सुनाने के लिए दादी चाहिये,
जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिए,
खीर खिलाने के लिए मामी चाहये,
साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिये,
पर यह सभी रिश्ते निभाने के लिए

बेटियां तो जिन्दा रहनी चाहये

घर आने पर दौड़ कर जो पास आये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

थक जाने पर प्यार से जो माथा सहलाए,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

“कल दिला देंगे” कहने पर जो मान जाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

हर रोज़ समय पर दवा की जो याद दिलाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।
घर को मन से फूल सा जो सजाये, उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

सहते हुए भी अपने दुख जो छुपा जाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

दूर जाने पर जो बहुत रुलाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

पति की होकर भी पिता को जो ना भूल पाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

मीलों दूर होकर भी पास होने का जो एहसास दिलाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧 ।।

“अनमोल हीरा” जो कहलाये,
उसे कहते हैं बिटिया 👧👧👧 ।।

अगर आप भी अपनी बेटी को प्यार करते हैं तो आप इसे अपने दोस्तों को अवश्य शेयर करें .

Posted in हिंदी कविता | Leave a comment

*पति-पत्नी* एक बनाया गया *रिश्ता*.

पहले कभी एक दूसरे को *देखा* भी नहीं था…
अब सारी *जिंदगी* एक दूसरे के साथ।पहले *अपरिचित*, फिर धीरे धीरे होता *परिचय*।
धीरे-धीरे होने वाला *स्पर्श*,
फिर *नोकझोंक*….*झगड़े*…बोलचाल *बंद*।
कभी *जिद*, कभी *अहम का भाव*……….

फिर धीरे धीरे बनती जाती *प्रेम पुष्पों* की *माला*
फिर *एकजीवता*, *तृप्तता*।

वैवाहिक जीवन को *परिपक्व* होने में *समय* लगता है।
धीरे धीरे जीवन में *स्वाद और मिठास* आती है…
ठीक वैसे ही जैसे *अचार* जैसे जैसे *पुराना* होता जाता है, उसका *स्वाद* बढ़ता जाता है…….

*पति पत्नी* एक दूसरे को अच्छी प्रकार *जानने समझने* लगते हैं,
*वृक्ष* बढ़ता जाता है,*
*बेलें फूटती* जातीं हैं,
*फूल*आते हैं, *फल* आते हैं,
रिश्ता और *मजबूत* होता जाता है, धीरे-धीरे बिना एक दूसरे के *अच्छा* ही नहीं लगता।

*उम्र* बढ़ती  जाती है, दोनों एक दूसरे पर अधिक *आश्रित* होते जाते हैं, एक दूसरे के बगैर *खालीपन* महसूस होने लगता है।

फिर धीरे-धीरे मन में एक *भय का निर्माण* होने लगता है,

              “ये चली गईं तो मैं कैसे जिऊँगा”……..??
“ये चले गए तो मैं कैसे जीऊँगी”……….??

अपने मन में *घुमड़ते इन सवालों* के बीच जैसे, खुद का *स्वतंत्र अस्तित्व* दोनों भूल जाते हैं।

कैसा अनोखा *रिश्ता*…
कौन कहाँ का और एक बनाया गया रिश्ता।

               *”पति-पत्नी”*

Posted in प्रेरणादायक | Leave a comment

हिंदी चुटकुले

1)….टीचर: तुम कहां पैदा हुए थे?

पप्पू: तिरुअनंतपुरम।

टीचर: इसकी स्पेलिंग बताओ?

पप्पू (थोड़ी देर सोचने के बाद): शायद गोवा में पैदा हुआ था।

Image result for laughing  images

2)…..पत्नी: खिड़की के परदे लगवा दो, नया पड़ोसी बार-बार घर में झांकता रहता है। मुझे देखने की कोशिश करता है।

कंजूस पति:एक बार ठीक से देख लेने दो, वह खुद ही परदे लगवा लेगा।

 

3)…..टीचर: दुनिया में कितने देश हैं?

राजू: एक ही है भारत।

टीचर: अच्छा? तो अमेरिका, फ्रांस,

इंग्लैंड, पाकिस्तान, जर्मनी आदि क्या हैं?

राजू: ये तो सारे विदेश हैं ना सर जी !

 

4)……एक आदमी डॉ. के पास चेकअप कराने गया

डॉ. ने कहा: आपको आराम की सख्त आवश्यकता है। नींद की गोली दे रहा हूं, बीवी को खिला देना।

Image result for laughing  images

 

5)…….पति पत्नी से: तुम बाहर जाती हो तो मुझे डर लगा रहता है।

पत्नी: मैं जल्दी आ जाऊंगी।

पति: इसी बात का तो डर लगा रहता है।

 

6)……एक बार एक स्कूल मे आग लग गई।

स्कूल की छुट्टी हो गई। सब बच्चे स्कूल से घर खुशी-खुशी जा रहे थे।

खुश इसलिए की स्कूल मे आग लग गई। अब स्कूल नही आना पड़ेगा।

लेकिन एक बच्चा बड़ा दुखी होकर स्कूल से जा रहा था।

टीचर ने उसको देखा उसे अपने पास बुलाया और पूछा बेटा सब बच्चे तो इतने खुश हैं।

लेकिन तुम दुखी क्यों हो।

लड़का बोला आग से स्कूल ही तो जला है।

मास्टर तो सारे बच गये।

कल मैदान मे बिठाकर पढ़ाने लगेंगे।

Image result for laughing  images

 

7)…..बच्चों में क्या अंतर होता है आइये देखते हैं-

चिडिय़ाघर मे कॉनवेन्ट स्कूल के बच्चे- oh !

wow monkey is sleeping, do not disturb.

सरकारी स्कूल के बच्चे ।

हऊ देख बनरा सुत्तल बा, मार ढेला सार के।

 

8)….लड़की – मेरे चेहरे में जलन हो रही है

डॉक्टर – आपके चेहरे का हमें एक्स रे करना पड़ेगा

लड़की – एक्स रे में क्या होता है

डॉक्टर – चेहरे की फोटो खींची जाती है

लड़की – 5 मिनट रुको मैं मेकअप कर लूं

डॉक्टर बेहोश

 

9)…….बीवी: सुनो जी, जब हमारी नई-नई शादी हुई थी तो जब मैं खाना बना कर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे, मुझे ज्यादा खिलाते थे।

पति: तो?

बीवी: तो अब ऐसा क्यों नहीं करते हो?

पति: क्योंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गई हो।

बीवी बेहोश

 

10)…बच्चा: पापा मर्द किसे कहते हैं?

पापा: उस शक्तिशाली इंसान को जो घर पर हुकूमत करता है।

बच्चा: मैं भी बड़ा होकर मम्मी की तरह मर्द बनूंगा।

 

Posted in हिंदी चुटकुले | 1 Comment

लक्ष्य के प्रमुख पड़ाव

Presentation1

लक्ष्य का निर्धारण

बिना लक्ष्य निर्धारण के व्यक्ति इधर- उधर भागता रहता है | अगर आप  को यह पता नही है कि आप की मंजील क्या है? आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं? आप की आकांक्षा क्या है तो आप के द्वरा की गई प्रत्येक कोशिश  बिना दिशा के चलने वाले नौका के समान होगी || ऐसे नौका का नाविक बस पतवार चलता रहता है और नव किसी और तट पर जाए या वापस वही पंहुचा जाए जहाँ से वह चला था इसका उसे कोई पता नहीं रहता है |

“Goals are the fule in the furnace of achievement” .

अपना लक्ष्य तय करने के बाद ही व्यक्ति उस लक्ष्य के बारे में गंभीरता से प्रयास करने लगता है | बहुत से व्यक्ति अपने सामने बहुत बरा लक्ष्य रख कर स्वयं को उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए झोक देता है |

कई व्यक्ति लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं जब की कई असफल भी हो जाते हैं |

हमारा मानना है की अंतिम बरे लक्ष्य के अपेक्षा छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारण कर लेना चाहिए | मान लो कि आप किसी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति को दो वर्ष देना चाहते हैं| तो आप अपने 6 – 6 माह के छोटे लक्ष्य निर्धरण कर लें एवं स्वयं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाले समस्याओं एवं कठिनाईयों का स्वयं आकलन करें | अपने प्रयासों का विश्लेष्ण , समीक्षा एवं कमी का ज्ञान आप को अगले लक्ष्य में मददगार होगी ||

Slide1

कहानी –

धीरूभाई अम्बानी ( 300 रूपये से 7500 डॉलर का सफर )

28 दिसम्बर 1932 को धीरूभाई का जन्म मोढ वैश्य परिवार में गुजरात में हुआ था | उसके पिता एक अध्यापक थे | जब वे 16 वर्ष के थे तो येमन चले गए जहाँ उन्होंने मात्र 300 रूपये प्रति माह (A.Besse and co.)  पर काम किया | इस कम्पनी की डिस्ट्रीब्युटर बन जाने से , धीरूभाई इस कम्पनी के पम्प का कार्य देखने लगे |

Image result for image of dhirubhai ambani

1958 में भारत वापस लौट आए एवं उन्होंने एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री की स्थापना की | धीरे धीरे अपनी निष्ठा एवं लगन से उन्होंने अपनी व्यवसाय को इतना बढ़ाया की लोग दांतों तले अंगुली दबाने लगे |

 

 

 

 

 

Posted in प्रेरणादायक | Leave a comment

Mother’s day special (अनपढ़ माँ की जिद्द ने बनाया आईएएस)

अहमदाबाद के प्रकाश कंवर को अपने अनपढ़ होने का मलाल था , लेकिन साधरण परिस्थित में गुजर बसर करते हुए आज अपनी बेटी डॉ. रतन कंवर को आईएएस बना देखकर वे गौरवान्वित है |

 

Slide1

रतन कंवर ने पहले अपनी मेहनत से MBBS की डिग्री हासिल की और फिर UPSC की परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल करने में कामयाब रही |

रतन कंवर बचपन से ही पढाई में होशियार रही | 10 वीं और 12 वीं में उसने 91% से भी ऊपर अंक प्राप्त किया था | उसने MBBS करने के बाद IAS करने की ठानी | उसका कहना था की आईएएस बन के माँ का वर्षों पुरानी इच्छा पूरी करनी है |

रतन कंवर ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते हुए कहा “डॉक्टर बनने के पहले और UPSC की परीक्षा के दौरान ऐसा लगता था , जैसे माँ को ही परीक्षा देनी है | वे मेरे साथ पूरी रात जागती थी , आज मेरी माँ सफल गो गई”

 

Slide4

माँ तो आखिर माँ होती है, हर माँ के दिल में एक अभिलाषा और आँखों में एक प्यास होती है कि उसका बच्चा सफल हो जाए| हर माँ यही सोचती है की उसका बच्चा सफल होकर कुछ बने जिससे की उसका और उसके परिवार का नाम रोशन हो सके |

लेकिन कई बच्चे ऐसे होते है जो की अपनी माँ की भावना को नहीं समझ पाते हैं | वे अपनी माँ के आँखों का प्यास नहीं देख पाते है | वे उनकी अभिलाषा की पूर्ति नहीं कर पाते|

इसका कारण सिर्फ एक है – और वह कारण यह है, कि जब आप छोटे से छोटे सफलता प्राप्त करते हैं तो आप उस वक्त ये अनुभव नही कर पाते हैं, कि आप की माँ इस छोटे से सफलता से कितनी खुश हो रही है |

 

जिस दिन आप को यह अनुभव हो गया समझो आपने अपने आगे की सफलता का मार्ग स्वयं खोल दिया है  और यही होता था रतन कंवर के साथ भी वह अपनी माँ के अनुभूति को बहुत समीप से अनुभव करती थी और एक के बाद एक सफलता प्राप्त करती रही ||

 

Posted in प्रेरणादायक | Leave a comment

Mother’s day special( माँ, तो महान होती है )

एक बार की बात है | एक जंगल में आम का एक बरा पेड़ था | एक प्यारा बच्चा रोज उस पेड़ पर खेलने आया करता था | वह कभी पेड़ की डाली तोड़ता कभी आम तोड़ता और उचल कूद करता रहता था | आम का पेड़ भी उस बच्चे से बहुत खुश रहता था | कई साल इस तरह ही बीत गए | अचानक एक दिन बच्चा कहीं चल गया और बहुत दिन तक नही आया | आम का पेड़ उस बच्चे का काफी दिनों तक इंतजार कर रहा था पर वह नहीं आया | अब पेड़ उदास रहने लगा |

एक बार की बात है | एक जंगल में आम का एक बरा पेड़ था | एक प्यारा बच्चा रोज उस पेड़ पर खेलने आया करता था | वह कभी पेड़ की डाली तोड़ता कभी आम तोड़ता और उचल कूद करता रहता था | आम का पेड़ भी उस बच्चे से बहुत खुश रहता था | कई साल इस तरह ही बीत गए | अचानक एक दिन बच्चा कहीं चल गया और बहुत दिन तक नही आया | आम का पेड़ उस बच्चे का काफी दिनों तक इंतजार कर रहा था पर वह नहीं आया | अब पेड़ उदास रहने लगा |

 

 

काफी साल बाद वह बच्चा फिर से पेड़ के पास आया पर वह कुछ बड़ा हो चुका था | पेड़ उसे देख कर काफी खुश हुआ और खेलने को कहा | पर बच्चा बोला अब वह बड़ा हो गया है | अब वह उसके साथ नही खेल सकता | उस बच्चे ने कहा कि मुझे अब खिलौने से खेलना अच्छा लगता है पर मेरे पास खिलौने खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं | पेड़ ने बोला उदास मत हो | तुम मेरे फल तोड़ लो और उसे बेच कर खिलौना खरीद लो | वह फल तोड़ कर ले गया और खुश रहने लगा | अचानक वह फिर से आना बंद कर दिया | पेड़ फिर से उसका राह देखने लगा |

Slide4

 

 

 

Image result for sad tree clip

अचानक बहुत दिनों बाद वह वापस आया लेकिन अब वह बड़ा हो चुका था | उसने पेड़ से कहा अब मेरी शादी हो गई है परन्तु मेरे पास रहने के लिए अपना घर नही है | पेड़ ने कहा दुखी मत हो “मैं हूँ ना” तुम मेरे टहनियों को काटकर एक अच्छा सा घर बना लो | उसने उसकी टहनियों को काटकर एक अच्छा सा घर बना लिया और आराम से रहने लगा | वह उस दिन के बाद से उस पेड़ के पास नहीं आया | परन्तु पेड़ उसका अब भी राह देख रहा था | वह इंतजार कर रहा था कि वह लड़का उससे मिलने जरुर आएगा  पर वह नहीं आया | एक दिन एक बड़ी सी  आंधी आई और वह कमजोर हो चुका पेड़ टूटकर गिर गया |

 

सीख – मित्रों “उसी पेड़ की तरह हमारे माता पिता होते हैं | परन्तु हमें उस बच्चे की तरह  नहीं  बनना चाहिए जो अपने माता पिता को नहीं देखते हैं |”

 

 

 

 

Posted in मुखपृष्ठ | 1 Comment

Mother’s day special ( माँ की ममता अनलोम )

Slide1

 

 

एक औरत थी, जो अंधी थी |

जिसके कारण उसके बेटे को स्कुल में बच्चे चिढाते थे ,

कि अंधा का बेटा आ गया !

हर बात में उसे यह सुनने को मिलता था की यह अंधी का बेटा है |

इस कारण वो अपनी माँ से चिढ़ता था |

उसे कही भी अपने साथ ले जाने से हिचकता था |

उसका बेटा उसे नापसंद करता था |

उसकी माँ ने उसे पढ़ाया …

और उसे इस लायक बनाया की

वो अपने पैरों पर खड़ा हो सके |

लेकिन जब वो बड़ा आदमी बन गया

तो अपने माँ से दूर रहने लगा |

एक दिन एक बूढी औरत

उसके घर आई और गार्ड से बोली …

मुझे तुम्हारे साहब से मिलना है |

जब गार्ड ने अपने साहब से बोला तो

साहब ने कहा कि बोल दो –

मैं अभी घर पर नहीं हूँ |

गार्ड ने जब बुढिया से बोला –

कि वो अभी नहीं हैं ,

तो वो वहा से चली गई |

थोरी देर बाद जब वह

अपने कर से ऑफिस के लिए

जा रहा था | तो देखा कि

सामने बहुत भीर लगी है |

और जानने के लिए कि

वहाँ भीड़ क्यों लगी है |

वह गया तो देखा की

उसकी माँ वहा मरी पड़ी थी |

उसके मुट्ठी में कुछ था |

जब उसने मुट्ठी खोला तो

पाया कि उसके मुट्ठी में

कागज का एक टुकरा था |

जिसमें लिखा था कि बेटा !

जब तू छोटा था तो

तेरे आंख में हसिया धंस गयी थी !

और तुम अंधा हो गया था |

तो मैंने ने तुम्हें अपनी आंख दे दी थी !

इतना पढ़ कर वह

जोर जोर से रोने लगा…….||

 

Slide1

Posted in मुखपृष्ठ | Leave a comment